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Tuesday, 5 February 2019

रामफल - केंसर पर रामबाण इलाज

कीमोथेरेपी से है 10 हज़ार गुना अधिक प्रभावशाली माना जाता है "रामफल"

ग्रेविओला जिसे हिंदी में रामफल कहते है, ज्यादातर अफ्रीका , दक्षिण अमेरिका और दक्षिणपूर्व एशिया के बरसाती जंगलों में पाया जाता है. कुछ साल पहले जब इसके बारे में नए रिसर्च किये गए तो पता चला की इसके रस में कई ऐसे तत्व होते है जो कैंसर का इलाज करने में काम आ सकता है. यह तत्व यकृत और स्तन कैंसर के कीटाणुओं को मारने की क्षमता रखतें है.यह शरीफे की तरह दिखने वाला फल भारत के कई इलाकों में भी मिलता है जैसे हैदराबाद जो तेलंगाना की राजधानी है. यहाँ की भाषा “तेलुगु” में भी इसे रामफल ही कहतें हैं. क्या रामफल सचमुच कैंसर को मारने की क्षमता रखता है. चलिये देखते है की इस खट्टे फल की क्या क्या खास बातें है और ये कैसे स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है ।
ग्रेविओला या रामफल मिलता कहाँ है ?
रामफल का पेड़ एक सदाबहार पेड़ है जो क्यूबा, मध्य अमेरिका, मैक्सिको, कोलंबिया, ब्राजील, पेरू, वेनेजुएला और अन्य अमेज़न के वर्षावन क्षेत्रों में पाया जाता है. यह फल लाखों कैंसर के रोगियों के लोगों के साथ-साथ उनके डॉक्टरों के लिए आशा की एक किरण के रूप में आता है। इसका वैज्ञानिक नाम एनोना मुरिकाता है, और इस फल को कैंसर के प्राकृतिक इलाज के रूप में पूरे समुदाय के लिए एक भगवान का उपहार माना जा सकता है। वैसे कई परिक्षण किए गए हैं लेकिन इसे कैंसर के लिए एक सिद्ध उपचार के रूप में घोषित करने से पहले बहुत और परिक्षण करने की जरूरत है. अभी तक के रिसर्च से ये माना जा रहा है के ये फल कैंसर के इलाज़ में काफी कारगर हो सकता है। ग्रेविओला , पत्ते, पाउडर, कैप्सूल के रूप में और यहां तक कि तरल रूपों में विभिन्न रूपों में उपलब्ध है ।
ग्रेविओला- एक फल अलग-अलग नाम-ग्रेविओला के समानार्थी शब्द
स्पेनिश लोग इसे “गुआनबाणा ” फल कहते हैं। पुर्तगाली “ग्रेविओला ” कहते हैं। ब्राजीलियाई ऐसे गंदा, गुयाबानो, करोसोलिएर , गुआनावाना , टोगे बांरेिसि , डूरियन बंगला , नंगका ब्लॉन्डा , सिर्सक , और नंगका लोंडा के रूप में अलग-अलग नामों से बुलाते हैं । दक्षिण भारतीय राज्य केरल में, यह बस कांटों के साथ शरीफा,या “मुल्लथा ” के रूप में जाना जाता है। अन्य भारतीय क्षेत्रों में, यह शूल -राम-फल और हनुमान फल के रूप में जाना जाता है।यह बड़े फल आकार का एक खट्टा फल है । यह कच्चा खाया जाता है और इसके गूदे या रस का शर्बत तैयार करने में भी उपयोग हो सकता है. इस फल के कैंसर रोधक गुण उल्लेखनीय हैं। कुछ रिपोर्टों के अनुसार, यह एक नियमित कीमोथेरेपी से दस हजार गुना अधिक प्रभावी हो सकता है।
ग्रेविओला के स्वास्थ्य लाभ और कुछ सामान्य गुण
Graviola Health Benefits In Hindi
इससे भी बड़ी बात ये है कि यह एक प्राकृतिक फलों का रस है, इसलिए किसी भी तरह का साइड इफ़ेक्ट नहीं होता ।
वैसे ग्रेविओला कई तरह के इलाज में उपयोग किया जाता है, यह मुखयतः अपने कैंसर विरोधी प्रभाव के लिए बहुत लोकप्रिय हो गया है ।
पेट के कीड़े और परजीवी इस फल से स्वाभाविक रूप से मारे जाते है
इसमें कोई शक नहीं कि ग्रेविओला कैंसर की रोकथाम का काम करता है
ग्रेविओला उच्च रक्तचाप के प्रबंधन और उपचार में भी प्रयोग किया जाता है
अपने एंटीबायोटिक या माइक्रोबियल विरोधी गुणों के कारण ग्रेविओला फंगल संक्रमण से लड़ने में अद्भुत काम करता है
तनाव, अवसाद और तंत्रिका संबंधी विकार से पीड़ित लोगों को इस फल लेने के बाद सकारात्मक परिणाम दिखाई दिए है
ग्रेविओला पेड़ कहीं भी आसानी से उगाया जा सकता है जैसे हैदराबाद और कई दूसरे जगहों पर ।

ग्रेविओला के औषधीय गुण
Medicinal Benefits Of Graviola In Hindi
इसकी पत्तियां कैंसर कोशिकाओं को मारने में समान रूप से प्रभावी हैं ।
यह कैंसर की कोशिकाओं को मारता है और एक प्राकृतिक चिकित्सा के रूप में प्रभावी है ।
जो इस फल का उपयोग करता है, उसका समग्र दृष्टिकोण में सुधार आता हैं ।
यह पेड़ और इसके हिस्से कई घातक संक्रमण के खिलाफ काम करतें है ।
केमो चिकित्सा के विपरीत इससे वजन घटना, बालों का झरना और मतली जैसे में कोई साइड इफेक्ट नहीं है ।
चाहे उपचार कितने दिन भी चले , आप हमेशा मजबूत और स्वस्थ महसूस करते हैं ।
ग्रेविओला का रस एक प्रतिरक्षा प्रणाली बूस्टर और रक्षक का काम करता है ।
ग्रेविओला पेड़ के रस का लाभ
इसका रस पेट के कैंसर, स्तन कैंसर, प्रोस्ट्रेट कैंसर, अग्नाशय के कैंसर और फेफड़ों के कैंसर कोशिकाओं को मारता है कैंसर कोशिकाओं को मारने के क्रम में यह स्वस्थ कोशिकाओं को कोई नुकसान नहीं करता है
ग्रेविओला के अन्य औषधीय उपयोग
ग्रेविओला पेड़ की छाल, जड़ और यहां तक कि फल के बीज विभिन्न स्वास्थ्य के मुद्दों के इलाज के लिए इस्तेमाल किया गया है, जैसे :

खराब लिवर
दमा
दिल के रोग
गठिया और जोड़ों से संबंधित बीमारियों

Saturday, 12 January 2019

पान का पत्ता - एक वरदान

किसी समारोह में या घर पर भोजन के बाद, बेहतर पाचन और मुखवास के रूप में प्रयोग किया जाने वाला पान, केवल स्वाद की पुड़िया नहीं है, बल्कि इससे आपकी कई तरह की समस्याएं हल हो सकती हैं..जानिए किन समस्याओं में कारगर है पान का पत्ता –

1- एंटीसेप्टिक – पान का पत्ता एक एंटीसेप्टिक का काम करता है। छोटी-मोटी चोट या खरोंच आने पर, या मोच आने पर पान का पत्ता लपेटना, या उसे पीस कर लगाने से लाभ होता है ।
2 नकसीर – नकसीर या नाक से खून आने की समस्या में पान के पत्ते सूंघने से लाभ होता है, और खून आना बंद हो जाता है।
3 लाल आंखें- थकान, नींद न होना या फिर आंखों में किसी कारण से समस्या होने पर, जब आंखें लाल हो जाएं, तो पान के पत्ते उबालकर ठंडे किए गए पानी के छींटे आंखों पर मारें।
4 मोटी आवाज- आवाज मोटी होने की स्थति में पान खाना और उसका पानी पीना बेहद लाभदायक होता है। इससे आवाज भी ठीक होती है, अैर गले की समस्याएं भी खत्म हो जाती हैं।
5 मसूड़े – मसूड़ों में खून आने या अन्य तकलीफ होने पर, पान को उबालकर उसके पानी से गरारे करने से, मसूड़ों से खून का की समस्या में लाभ मि‍लता है।
6 ब्रोंकाईटिस – पान के 7 पत्ते को दो कप पानी में चीनी के साथ उबालें। जब यह पानी 1 गिलास रह जाए, तब इसे दिन में 3 बार पीने से ब्रोंकाईटिस में लाभ होता है।
7 कफ – पान के 15 पत्ते, तीन गिलास पानी में उबालें । जब यह पानी एक तिहाई रह जाए तो इसे दवा के रूप में दिन में 3 बार पिएं। इससे कफ निकलने में आसानी होगी।
8 शरीर की दुर्गंध – शरीर की दुर्गंध लगातार बने रहने पर, पान के 5 पत्ते, दो कप पानी में उबालकर इस पानी को दोपहर के वक्त पीने से लाभ मि‍लता है।
9 खुजली – शरीर में खुजली की समस्या होने पर, पान के पत्ते उबालकर उस पानी से नहाने से खुजली ठीक हो जाती है।
10 स्तनपान – स्तनपान कराते समय दर्द अैर सूजन के कारण परेशानी आ रही हो, तो पान के पत्तों पर नारियल का तेल लगाकर हल्का सा गर्म कर लें, और स्तनों के पास रखें। इससे सूजन कम होगी और स्तनपान में आसानी होगी।
11-बवासीर- दो दिन सिर्फ पान के पत्ते खाएं और इसके अलावा कुछ नहीं। 48 घंटे में बवासीर जड़ से खत्म हो जाएगी। अब तक कई लोग इस नुस्खे से ठीक हो चुके हैं।
तो आजमाएं यह वरदान अपने स्वास्थ्य के लिए ।

Wednesday, 1 March 2017

मेथी का पानी

*1 महीने पीएं मेथी का पानी, शरीर के हर पार्ट में आएगा ये चमत्कारिक बदलाव*

   ♨ *आयुष पिपलिया मंदसौर* ♨

🌼घर पर आसानी से मिल जाने वाली मेथी में इतने सारे गुण है कि आप सोच भी नहीं सकते है। यह सिर्फ एक मसाला नहीं है बल्कि एक ऐसी दवा है जिसमें हर बीमारी को खत्म करने का दम है। आइए आज हम आपको मेथी के पानी के कुछ चमत्कारिक तरीके बताते हैं।

*करें ये काम*

🌼एक पानी से भरा गिलास ले कर उसमें दो चम्‍मच मेथी दाना डाल कर रातभर के लिये भिगो दें। सुबह इस पानी को छानें और खाली पेट पी जाएं। रातभर मेथी भिगोने से पानी में एंटी इंफ्लेमेटरी और एंटी ऑक्‍सीडेंट गुण बढ जाते हैं। इससे शरीर की तमाम बीमारियां चुटकियों में खत्म हो जाती है। आइए आपको बताते है कि कौन सी है वो खतरनाक 7 बीमारियां जो भग जाएंगी इस पानी को पीने से।

*वजन होगा कम*

🌼यदि आप भिगोई हुई मेथी के साथ उसका पानी भी पियें तो आपको जबरदस्‍ती की भूख नहीं लगेगी। रोज एक महीने तक मेथी का पानी पीने से वजन कम करने में मदद मिलती है।

*गठिया रोग से बचाए*

🌼इसमें एंटीऑक्‍सीडेंट और एंटी इंफ्लेमेटरी गुण होने के नातेए मेथी का पानी गठिया से होने वाले दर्द में भी राहत दिलाती है।

*कोलेस्‍ट्रॉल लेवल घटाए*

🌼बहुत सारी स्‍टडीज़ में प्रूव हुआ है कि मेथी खाने से या उसका पानी पीने से शरीर से खराब कोलेस्‍ट्रॉल का लेवल कम होकर अच्‍छे कोलेस्‍ट्रॉल का लेवल बढ़ता है।

*ब्लड प्रेशर होगा कंट्रोल*

🌼मेथी में एक galactomannan नामक कम्‍पाउंड और पोटैशियम होता है। ये दो सामग्रियां आपके ब्‍लड प्रेशर को कंट्रोल करने में बड़ी ही सहायक होती हैं।

*कैंसर से बचाए*

🌼मेथी में ढेर सारा फाइबर होता है जो कि शरीर से विषैले तत्‍वों को निकाल फेंकती है और पेट के कैंसर से बचाती है।

*किडनी स्‍टोन*

🌼अगर आप भिगोई हुई मेथी का पानी 1 महीने तक हर सुबह खाली पेट पियेंगे आपकी किडनी से स्‍टोन जल्‍द ही निकल जाएंगे।

*मधुमेह*

🌼मेथी में galactomannan होता है जो कि एक बहुत जरुरी फाइबर कम्‍पाउंड है। इससे रक्‍त में शक्‍कर बड़ी ही धीमी गति से घुलती है। इस कारण से मधुमेह नहीं होता।

🌳इस जानकारी को अपने मित्रो और शुभचिंतको तक पहुचाने के लिए कृपया शेयर जरुर करे।

   ☘🌱🌿जी🌿🌱☘

Tuesday, 21 February 2017

Medical Bulletin Hindi

☘🌵🍂🍃🌳🌳🌴🌵🌾🌿☞☞1यदि आपको रात में नींद नहीं आती, तो अपनी पलकें एक मिनट तक जोर-जोर से झपकाएँ कुछ ही देर में नींद आ जाएगी
✍2. सुबह उठकर यदि आपको रात की बात याद नहीं रहती, तो उस बात को रात में सोने से पहले एक बार दोहराएँ. वह बात सुबह आपको जरूर याद रहेगी।
✍3. गर्म पानी से नहाने के बाद, थोड़ा सा ठंडा पानी शरीर पर डालने से शरीर कई तरह की बीमारियों से दूर रहता है।
✍4. एक रिसर्च के मुताबिक, हमारा दाहिना कान बातों और शब्दों को बेहतर सुन सकता है जबकि बाएं कान से संगीत बेहतर सुना जा सकता है।
✍6. यदि आपको चक्कर आ रहे हैं, तो बिस्तर पर लेट कर एक पैर जमीन पर रखिए. चक्कर आने बंद हो जाएंगे।
✍7. यदि माइग्रेन का दर्द नहीं जा रहा, तो अपने हाथों को बर्फ़ के ठंडे पानी में डालिए, दर्द काफ़ी हद तक खत्म हो जाएगा।
✍8. यदि मच्छर के काटने के बाद उस जगह पर ख़ुजली हो रही है, तो उस जगह पर डियो लगा लीजिए, ख़ुजली तुरंत बंद हो जाएगी।
✍9. यदि आपको बे-वक्त नींद आ रही है, जैसे बस में या क्लास में आदि. तो अपनी सांस को तब तक रखिए जब तक आप रोक सकते हैं. फिर सांस छोड़ दे. इस से नींद एकदम से गायब हो जाएगी।
✍10. अगर हंसी नहीं रुक रही, तो ख़ुद को ज़ोर से चूंटी काट लीजिए. हंसना बंद हो जाएगा।
✍11. टेंशन और सिरदर्द से छुटकारा पाने के लिए जमीन पर लेट कर पैरों को ऊपर करके दीवार पर लगा ले. इससे काफी फायदा होगा।
✍12. अंगूर का जूस आपका मानसिक तनाव दूर कर सकता है।
✍13. बच्चों की नज़र तेज करने के लिए उनके बेड की दिशा बदलते रहें, इससे उसका एंगल बदल जाएगा, और नजर में सुधार होगा. इसे आप भी कर सकते हैं।
✍14. दिन भर की थकान के बाद यदि आपको आराम चाहिए, तो एक ठंडे पानी की बोतल को अपने पैरों के नीचे रख कर आगे-पीछे करें. जल्द ही आपके पैरों की थकान दूर होगी।
✍15. आजकल हर छोटी-छोटी बात पर डॉक्टर एक्स-रे करवाने लग गए हैं. क्या आप जानते हैं कि एक्स-रे करवाने के दौरान निकली घातक रेडियोएक्टिव किरणें कैंसर पैदा करती हैं. एक मामूली एक्स-रे करवाने में शरीर को हुई हानि की भरपाई करने में कम से कम एक वर्ष का समय लगता हैं।।

Monday, 16 January 2017

खांसी में कोफी का प्रयोग

*⚫》 खांसी में स्टेरॉयड का भी बाप है कॉफ़ी का ये प्रयोग*
⚫⚫⚫⚫⚫⚫⚫⚫
● क्या आपको अक्सर ही खांसी लगी रहती है ?
क्या आपकी खांसी बहुत पुरानी हो चुकी है ?
क्या बार बार दवा लेने के बाद भी आपकी खांसी नहीं जा रही ?

⚫और आप दवा ले ले कर परेशान हो गए हो तो अभी ये जो फार्मूला हम बताने जा रहें हैं ये खांसी के मामले में स्टेरॉयड का भी बाप है. स्टेरॉयड कोई दवा नहीं होती ये डॉक्टर तब दिए जाते हैं जब कोई दवा असर ना करे. और स्टेरॉयड शरीर के लिए बेहद हानिकारक है. इस नुस्खे के बारे में हम ये भी बताना चाहते हैं के अनेक आधुनिक डॉक्टर भी इस का रिजल्ट देख कर चकित हो गए हैं. तो आइये जाने ये बेहतरीन नुस्खा.

*⚫》इस प्रयोग में आवश्यक सामग्री.*

▪  एक कप बनी हुयी फीकी काली कॉफ़ी (बिना दूध और चीनी के)
▪ दो चम्मच शहद
▪ दालचीनी – एक चुटकी (इच्छा अनुसार)

*⚫》इसके उपयोग की विधि*

⚫एक कप गर्म कॉफ़ी में दो चम्मच शहद अच्छे से मिला लीजिये. अब इस कॉफ़ी को धीरे धीरे घूँट घूँट कर पीजिये. यह प्रयोग दिन में दो बार कीजिये. सुबह और शाम को. पुराने से पुरानी और किसी भी प्रकार की खांसी इस प्रयोग के कुछ दिन करने से छू मंतर हो जाती है.

*☆☆ हो चुके हैं शोध.*

⚫कफ की समस्या वाले 97 रोगियों पर यह प्रयोग किया गया जिसमे इतना चौंकाने वाले रिजल्ट मिले के कई मल्टी नेशनल फार्मा कंपनियों की रातों की नींद और दिन का चैन उड़ गया. इस ड्रिंक को और शक्तिशाली बनाने के लिए आप इसमें चुटकी भर दालचीनी का पाउडर भी डाल सकते हैं.

⚫आपके सु स्वास्थ्य की कामना रखते हैं. आप जब भी ये प्रयोग करें तो हमको अपने रिजल्ट एक हफ्ते के बाद ज़रूर बताएं. वैसे तो आप पहले ही बता देंगे क्यूंकि ये रिजल्ट ही इतना जल्दी देता है.

*● विशेष जब भी खांसी हो तो ये प्रयोग आजमा लिया कीजिये. आज के बाद कभी खांसी की कोई दवा तुरंत ना लें. पहले ये प्रयोग कर के देख ले.*

संकलन : Dr. Hitesh Karia

Wednesday, 4 January 2017

तेल के गण :तिल का तेल

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*पृथ्वी का अमृत.. तिल का तेल...*

( 5 मिनिट का समय निकाल कर पोस्ट को जरूर पढ़े )

यदि इस पृथ्वी पर उपलब्ध सर्वोत्तम खाद्य पदार्थों की बात की जाए तो तिल के तेल का नाम अवश्य आएगा और यही सर्वोत्तम पदार्थ बाजार में उपलब्ध नहीं है. और ना ही आने वाली पीढ़ियों को इसके गुण पता हैं. क्योंकि नई पीढ़ी तो टी वी के इश्तिहार देख कर ही सारा सामान ख़रीदती है.
और तिल के तेल का प्रचार कंपनियाँ इसलिए नहीं करती क्योंकि इसके गुण जान लेने के बाद आप उन द्वारा बेचा जाने वाला तरल चिकना पदार्थ जिसे वह तेल कहते हैं लेना बंद कर देंगे.
तिल के तेल में इतनी ताकत होती है कि यह पत्थर को भी चीर देता है. प्रयोग करके देखें.... आप पर्वत का पत्थर लिजिए और उसमे कटोरी के जैसा खडडा बना लिजिए, उसमे पानी, दुध, धी या तेजाब संसार में कोई सा भी कैमिकल, ऐसिड डाल दीजिए, पत्थर में वैसा की वैसा ही रहेगा, कही नहीं जायेगा... लेकिन... अगर आप ने उस कटोरी नुमा पत्थर में तिल का तेल डाल दीजिए, उस खड्डे में भर दिजिये.. 2 दिन बाद आप देखेंगे कि, तिल का तेल... पत्थर के अन्दर भी प्रवेश करके, पत्थर के नीचे आ जायेगा. यह होती है तेल की ताकत, इस तेल की मालिश करने से हड्डियों को पार करता हुआ, हड्डियों को मजबूती प्रदान करता है. तिल के तेल के अन्दर फास्फोरस होता है जो कि हड्डियों की मजबूती का अहम भूमिका अदा करता है.
और तिल का तेल ऐसी वस्तु है जो अगर कोई भी भारतीय चाहे तो थोड़ी सी मेहनत के बाद आसानी से प्राप्त कर सकता है. तब उसे किसी भी कंपनी का तेल खरीदने की आवश्यकता ही नही होगी. तिल खरीद लीजिए और किसी भी तेल निकालने वाले से उनका तेल निकलवा लीजिए. लेकिन सावधान तिल का तेल सिर्फ कच्ची घाणी (लकडी की बनी हुई) का ही प्रयोग करना चाहिए.
तैल शब्द की व्युत्पत्ति तिल शब्द से ही हुई है। जो तिल से निकलता वह है तैल। अर्थात तेल का असली अर्थ ही है "तिल का तेल".
तिल के तेल का सबसे बड़ा गुण यह है की यह शरीर के लिए आयुषधि का काम करता है.. चाहे आपको कोई भी रोग हो यह उससे लड़ने की क्षमता शरीर में विकसित करना आरंभ कर देता है. यह गुण इस पृथ्वी के अन्य किसी खाद्य पदार्थ में नहीं पाया जाता.
सौ ग्राम सफेद तिल 1000 मिलीग्राम कैल्शियम प्राप्त होता हैं। बादाम की अपेक्षा तिल में छः गुना से भी अधिक कैल्शियम है।
काले और लाल तिल में लौह तत्वों की भरपूर मात्रा होती है जो रक्तअल्पता के इलाज़ में कारगर साबित होती है।
तिल में उपस्थित लेसिथिन नामक रसायन कोलेस्ट्रोल के बहाव को रक्त नलिकाओं में बनाए रखने में मददगार होता है।
तिल के तेल में प्राकृतिक रूप में उपस्थित सिस्मोल एक ऐसा एंटी-ऑक्सीडेंट है जो इसे ऊँचे तापमान पर भी बहुत जल्दी खराब नहीं होने देता। आयुर्वेद चरक संहित में इसे पकाने के लिए सबसे अच्छा तेल माना गया है।
तिल में विटामिन  सी छोड़कर वे सभी आवश्यक पौष्टिक पदार्थ होते हैं जो अच्छे स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक होते हैं। तिल विटामिन बी और आवश्यक फैटी एसिड्स से भरपूर है।
इसमें मीथोनाइन और ट्रायप्टोफन नामक दो बहुत महत्त्वपूर्ण एमिनो एसिड्स होते हैं जो चना, मूँगफली, राजमा, चौला और सोयाबीन जैसे अधिकांश शाकाहारी खाद्य पदार्थों में नहीं होते। ट्रायोप्टोफन को शांति प्रदान करने वाला तत्व भी कहा जाता है जो गहरी नींद लाने में सक्षम है। यही त्वचा और बालों को भी स्वस्थ रखता है। मीथोनाइन लीवर को दुरुस्त रखता है और कॉलेस्ट्रोल को भी नियंत्रित रखता है।
तिलबीज स्वास्थ्यवर्द्धक वसा का बड़ा स्त्रोत है जो चयापचय को बढ़ाता है।
यह कब्ज भी नहीं होने देता।
तिलबीजों में उपस्थित पौष्टिक तत्व,जैसे-कैल्शियम और आयरन त्वचा को कांतिमय बनाए रखते हैं।
तिल में न्यूनतम सैचुरेटेड फैट होते हैं इसलिए इससे बने खाद्य पदार्थ उच्च रक्तचाप को कम करने में मदद कर सकता है।
सीधा अर्थ यह है की यदि आप नियमित रूप से स्वयं द्वारा निकलवाए हुए शुद्ध तिल के तेल का सेवन करते हैं तो आप के बीमार होने की संभावना ही ना के बराबर रह जाएगी. जब शरीर बीमार ही नही होगा तो उपचार की भी आवश्यकता नही होगी. यही तो आयुर्वेद है.. आयुर्वेद का मूल सीधांत यही है की उचित आहार विहार से ही शरीर को स्वस्थ रखिए ताकि शरीर को आयुषधि की आवश्यकता ही ना पड़े.
एक बात का ध्यान अवश्य रखिएगा की बाजार में कुछ लोग तिल के तेल के नाम पर अन्य कोई तेल बेच रहे हैं.. जिसकी पहचान करना मुश्किल होगा. ऐसे में अपने सामने निकाले हुए तेल का ही भरोसा करें. यह काम थोड़ा सा मुश्किल ज़रूर है किंतु पहली बार की मेहनत के प्रयास स्वरूप यह शुद्ध तेल आपकी पहुँच में हो जाएगा. जब चाहें जाएँ और तेल निकलवा कर ले आएँ.

तिल में मोनो-सैचुरेटेड फैटी एसिड (mono-unsaturated fatty acid) होता है जो शरीर से बैड कोलेस्ट्रोल को कम करके गुड कोलेस्ट्रोल यानि एच.डी.एल. (HDL) को बढ़ाने में मदद करता है। यह हृदय रोग, दिल का दौरा और धमनीकलाकाठिन्य (atherosclerosis) के संभावना को कम करता है।
कैंसर से सुरक्षा प्रदान करता है-
तिल में सेसमीन (sesamin) नाम का एन्टीऑक्सिडेंट (antioxidant) होता है जो कैंसर के कोशिकाओं को बढ़ने से रोकने के साथ-साथ है और उसके जीवित रहने वाले रसायन के उत्पादन को भी रोकने में मदद करता है। यह फेफड़ों का कैंसर, पेट के कैंसर, ल्यूकेमिया, प्रोस्टेट कैंसर, स्तन कैंसर और अग्नाशय के कैंसर के प्रभाव को कम करने में बहुत मदद करता है।
तनाव को कम करता है-
इसमें नियासिन (niacin) नाम का विटामिन होता है जो तनाव और अवसाद को कम करने में मदद करता है।
हृदय के मांसपेशियों को स्वस्थ रखने में मदद करता है-
तिल में ज़रूरी मिनरल जैसे कैल्सियम, आयरन, मैग्नेशियम, जिन्क, और सेलेनियम होता है जो हृदय के मांसपेशियों को सुचारू रूप से काम करने में मदद करता है और हृदय को नियमित अंतराल में धड़कने में मदद करता है।
शिशु के हड्डियों को मजबूती प्रदान करता है-
तिल में डायटरी प्रोटीन और एमिनो एसिड होता है जो बच्चों के हड्डियों के विकसित होने में और मजबूती प्रदान करने में मदद करता है। उदाहरणस्वरूप 100ग्राम तिल में लगभग 18 ग्राम प्रोटीन होता है, जो बच्चों के विकास के लिए बहुत ज़रूरी होता है।
गर्भवती महिला और भ्रूण (foetus) को स्वस्थ रखने में मदद करता है-
तिल में फोलिक एसिड होता है जो गर्भवती महिला और भ्रूण के विकास और स्वस्थ रखने में मदद करता है।
शिशुओं के लिए तेल मालिश के रूप में काम करता है-
अध्ययन के अनुसार तिल के तेल से शिशुओं को मालिश करने पर उनकी मांसपेशियाँ सख्त होती है साथ ही उनका अच्छा विकास होता है। आयुर्वेद के अनुसार इस तेल से मालिश करने पर शिशु आराम से सोते हैं।
अस्थि-सुषिरता (osteoporosis) से लड़ने में मदद करता है-
तिल में जिन्क और कैल्सियम होता है जो अस्थि-सुषिरता से संभावना को कम करने में मदद करता है।
मधुमेह के दवाईयों को प्रभावकारी बनाता है-
डिपार्टमेंट ऑफ बायोथेक्सनॉलॉजी विनायक मिशन यूनवर्सिटी, तमिलनाडु (Department of Biothechnology at the Vinayaka Missions University, Tamil Nadu) के अध्ययन के अनुसार यह उच्च रक्तचाप को कम करने के साथ-साथ इसका एन्टी ग्लिसेमिक प्रभाव रक्त में ग्लूकोज़ के स्तर को 36% कम करने में मदद करता है जब यह मधुमेह विरोधी दवा ग्लिबेक्लेमाइड (glibenclamide) से मिलकर काम करता है। इसलिए टाइप-2 मधुमेह (type 2 diabetic) रोगी के लिए यह मददगार साबित होता है।
दूध के तुलना में तिल में तीन गुना कैल्शियम रहता है। इसमें कैल्शियम, विटामिन बी और ई, आयरन और ज़िंक, प्रोटीन की भरपूर मात्रा रहती है और कोलेस्टरोल बिल्कुल नहीं रहता है। तिल का तेल ऐसा तेल है, जो सालों तक खराब नहीं होता है, यहाँ तक कि गर्मी के दिनों में भी वैसा की वैसा ही रहता है.
तिल का तेल कोई साधारण तेल नहीं है। इसकी मालिश से शरीर काफी आराम मिलता है। यहां तक कि लकवा जैसे रोगों तक को ठीक करने की क्षमता रखता है। इससे अगर आप महिलाएं अपने स्तन के नीचे से ऊपर की ओर मालिश करें, तो स्तन पुष्ट होते हैं। सर्दी के मौसम में इस तेल से शरीर की मालिश करें, तो ठंड का एहसास नहीं होता। इससे चेहरे की मालिश भी कर सकते हैं। चेहरे की सुंदरता एवं कोमलता बनाये रखेगा। यह सूखी त्वचा के लिए उपयोगी है।
तिल का तेल- तिल विटामिन ए व ई से भरपूर होता है। इस कारण इसका तेल भी इतना ही महत्व रखता है। इसे हल्का गरम कर त्वचा पर मालिश करने से निखार आता है। अगर बालों में लगाते हैं, तो बालों में निखार आता है, लंबे होते हैं।
जोड़ों का दर्द हो, तो तिल के तेल में थोड़ी सी सोंठ पावडर, एक चुटकी हींग पावडर डाल कर गर्म कर मालिश करें। तिल का तेल खाने में भी उतना ही पौष्टिक है विशेषकर पुरुषों के लिए।इससे मर्दानगी की ताकत मिलती है!
Compiled by :
Dr. Hitesh Karia.