Tuesday, 19 March 2019

होलिका दहन की कहानी,पूजा विधि

होलिका दहन की कहानी, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
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होलिका दहन से दूर करें घर की नकारात्मकता
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रंगों का त्यौहार होली किसी न किसी रुप में पूरे विश्व में मनायी जाती है, लेकिन संभवतः होलिका दहन का प्रावधान भारत में ही है। यह एक तरह से बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। होलिका दहन, रंगों वाली होली के एक दिन पहले यानी फाल्गुन मास की पूर्णिमा को किया जाता है। इसके अगले दिन रंगों से खेलने की परंपरा है जिसे धुलेंडी, धुलंडी आदि नामों से भी जाना जाता है।

होलिका दहन के नियम
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– वर्ष 2019 में फाल्गुन पूर्णिमा यानि 20 मार्च के प्रदोष काल में होलिका दहन होगा। 20 मार्च को भद्रा पूंछ शाम 5.35 से 6.35 और भद्रा मुख शाम 6.35 से 8.17  बजे तक रहेगा। ऐसे में होलिका दहन का शुभ मुहुर्त रात 8.59 बजे के बाद होगा।
– फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से फाल्गुन पूर्णिमा तक होलाष्टक माना जाता है। इस दौरान शुभ कार्य वर्जित रहते हैं।
– पूर्णिमा के दिन होलिका-दहन किया जाता है। इस दौरान यह ध्यान रखना चाहिए कि उस दिन “भद्रा” न हो।
– पूर्णिमा प्रदोषकाल-व्यापिनी होनी चाहिए। इसे अासान शब्दों में ऐसे समझ सकते हैं कि उस दिन सूर्यास्त के बाद के तीन मुहूर्तों में पूर्णिमा तिथि होनी चाहिए।

होलिका दहन की कहानी
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पौराणिक मान्यता के अनुसार दैत्यराज हिरण्यकश्यप खुद को भगवान मानता था, लेकिन उसका पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु के अलावा किसी की पूजा नहीं करता था। यह देख हिरण्यकश्यप काफी क्रोधित हुअा और अंततः उसने अपनी बहन होलिका को आदेश दिया की वह प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठ जाए। होलिका को वरदान प्राप्त था कि उसे अाग से कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा लेकिन भगवान विष्णु की कृपा से प्रह्लाद अाग से बच गया, जबकि होलिका अाग में जलकर भस्म हो गई। उस दिन फाल्गुन मास की पुर्णिमा थी। इसी घटना की याद में होलिका दहन करने का विधान है। बाद में भगवान विष्णु ने लोगों को अत्याचार से निजात दिलाने के लिए नरसिंह अवतार लेकर हिरण्यकश्यप का वध किया।

होलिका दहन का इतिहास
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होली के त्यौहार के बारे में कई प्राचीन जानकारी भी है। प्राचीन विजयनगर साम्राज्य की राजधानी हम्पी में मिले 16वीं शताब्दी के एक चित्र में होली पर्व का उल्लेख मिलता है। इतना ही नहीं, विंध्य पर्वतों के निकट रामगढ़ में मिले ईसा से 300 वर्ष पुराने अभिलेख में भी इसका उल्लेख मिलता है। यह भी मान्यता है कि इस दिन भगवान श्री कृष्ण ने पूतना राक्षसी का वध किया था। इस खुशी में गोपियों ने उनके साथ होली खेली थी।

होलिका में दें इनकी अाहुति
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– होलिका दहन के दौरान कच्चे आम, नारियल, भुट्टे, सप्तधान्य, चीनी के बने खिलौने, सांकेतिक रुप से नई फसल का कुछ अंश की अाहुति दी जाती है।

होलिका दहन पूजा
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– होलिका दहन से पहले पूजा की जाती है।
– इस दौरान होलिका के पास जाकर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठकर पूजा करनी चाहिए।
– कच्चे सूत को होलिका के चारों और तीन या सात परिक्रमा करते हुए लपेटना होता है।
– शुद्ध जल व अन्य पूजन सामग्रियों को एक-एक कर होलिका को समर्पित किया जाता है।
– पूजन के बाद जल से अर्ध्य दिया जाता है.
– एक लोटा जल, माला, रोली, चावल, गंध, पुष्प, कच्चा सूत, गुड़, साबुत हल्दी, मूंग, बताशे, गुलाल, नारियल आदि।
– नई फसल के अंश जैसे पके चने और गेंहूं की बालियां भी शामिल की जाती हैं।

होली की मान्यता
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– मान्यता है कि होलिका की अग्नि में सेक कर लाये गये अनाज खाने से व्यक्ति निरोग रहता है।
– होली की बची हुई अग्नि और राख को अगले दिन प्रात: घर में लाने से घर से नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं।

कब हो होलिका दहन?
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– होलिका का पूजन करने के बाद होलिका का दहन किया जाता है।
– होलिका दहन हमेशा भद्रा के बाद ही करना चाहिए।
– चतुर्दशी तिथि या प्रतिपदा में भी होलिका दहन नहीं किया जाता है।
– सूर्यास्त से पहले कभी भी होलिका दहन नहीं करना चाहिए।

होलिका दहन का मुहूर्त
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18:36 से 21:00 बजे तक।
अवधि : 2 घंटा 23 मिनट
भद्रा पूंछ : 14:53 से 15:54 तक।
भद्रा मुख : 15:54 से 17:37 तक।

पूर्णिमा तिथि अारंभ : 10:45 बजे 20 मार्च 2019
पूर्णिमा तिथि समाप्त : 07:12 बजे 21 मार्च 2019
रंगवाली होली : 21 मार्च
*होली में करें कुछ उपाय तो धन ,अन्न और जन सबकी बर्कत होगी ।*

*कारोबार में बरकत बढ़ाने के लिए*

*होली (20 मार्च 2019) की रात को दूध और चावल की खीर बनवा ले घर पे ... भले एक कटोरी | होली की रात को चन्द्रमा को अर्घ्य दें ... दीपक जलाकर दिखा दें और कटोरी में खीर जो है वो थाली में रख दें ..मन ही मन प्रार्थना कर लें " हे भगवान! भगवद गीता में आपने कहा है नक्षत्रों का अधिपति चन्द्रमा में हूँ | हे भगवन! आज हमने अपने घर पे आपके लिए ये प्रसाद तैयार किया है | आप इसको स्वीकार करें |*

*" और ये मंत्र जपें :-*
*ॐ सोमाय नमः*
*ॐ चन्द्रमसे नमः*
*ॐ रोहिणी कान्ताये नमः*

*ऐसा करके थोड़ी देर प्रार्थना करके शांत हो कर बैठें |*

*होली की रात तो ये करने से जिनका अपना काम काज है उसमें बरकत निश्चित रूप से होती है और गुरुमंत्र का जप करें |*

         
*होली के दिन पूजा विशेष*

*होली के दिन हनुमान जी के पूजा का विशेष विधान है, हो सके तो करना | पूजा का मतलब यह जरूरी नहीं की हनुमान जी के आगे दिया जलायें तब ही वे प्रसन्न होंगे | "श्रीगुरु चरण सरोज रज, निज मनु मुकुर सुधारि बरनउ रघुवर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि", " मनोजवं मारुततुल्य वेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठं | वातात्मजं वानरयूथ मुख्यं श्री राम दूतं शरणं प्रपद्ये || " ऐसी प्रार्थना कर दी, वे राजी हो जायेंगे | होली के दिन एक बार जरूर कर लें, बहुत लाभ होगा |*

*होली के दिन शास्त्रों में लक्ष्मी माता की पूजा का भी विधान बताया गया है | वह कपूर का दिया जलाकर करें | थोड़ा सा ही कपूर जलायें | होली का पर्व दरिद्रता का नाश करनेवाला पर्व है |*

*ज्योतिष शास्त्र*

*फाल्गुन मास की पूर्णिमा को होलिका दहन किया जाता है। इस बार ये पर्व 20 मार्च,बुधवार को है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार,इस दिन किए गए उपाय बहुत ही जल्दी शुभ फल प्रदान करते हैं। आज हम आपको होली पर किए जाने वाले ऐसे ही अचूक उपायों के बारे में बता रहे हैं,जो इस प्रकार हैं-*

*1.होली की रात सरसों के तेल का चौमुखी दीपक घर के मुख्य द्वार पर लगाएं व उसकी पूजा करें। इसके बाद भगवान से सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें। इस प्रयोग से हर प्रकार की बाधा का निवारण होता है।*

*2.यदि व्यापार या नौकरी में उन्नति न हो रही हो,तो 21 गोमती चक्र लेकर होलिका दहन की रात में शिवलिंग पर चढ़ा दें। इससे बिजनेस में फायदा होने लगेगा।*

*3.होली पर किसी गरीब को भोजन अवश्य कराएं। इससे आपकी मनोकामना पूरी होगी।*

*4. यदि राहु के कारण परेशानी है तो एक नारियल का गोला लेकर उसमें अलसी का तेल भरें। उसी में थोड़ा सा गुड़ डालें और इस गोले को जलती हुई होलिका में डाल दें। इससे राहु का बुरा प्रभाव समाप्त हो जाएगा।*

*5. धन हानि से बचने के लिए होली के दिन घर के मुख्य द्वार पर गुलाल छिड़कें और उस पर दोमुखी दीपक जलाएं। दीपक जलाते समय धन हानि से बचाव की कामना करें। जब दीपक बुझ जाए तो उसे होली की अग्नि में डाल दें। यह क्रिया श्रद्धापूर्वक करें, धन हानि नहीं होगी।*

*6. घर की सुख-समृद्धि के लिए परिवार के प्रत्येक सदस्य को होलिका दहन में घी में भिगोई हुई दो लौंग, एक बताशा और एक पान का पत्ता अवश्य चढ़ाना चाहिए। साथ ही होली की 11 परिक्रमा करते हुए होली में सूखे नारियल की आहुति देनी चाहिए।*

*7. अगर किसी ने आप पर कोई टोटका किया है तो होली की रात जहां होलिका दहन हो, उस जगह एक गड्ढा खोदकर उसमें 11 अभिमंत्रित कौड़ियां दबा दें। अगले दिन कौड़ियों को निकालकर अपने घर की मिट्टी के साथ नीले कपड़े में बांधकर बहते जल में प्रवाहित कर दें। जो भी तंत्र क्रिया आप पर किसी ने की होगी वह नष्ट हो जाएगी।*

*8. यदि आपके घर में किसी भूत-प्रेत का साया है तो जब होली जल जाए, तब आप होलिका की थोड़ी-सी अग्नि अपने घर ले आएं और अपने घर के आग्नेय कोण में उस अग्नि को तांबे या मिट्टी के पात्र में रखें। सरसों के तेल का दीपक जलाएं। इस उपाय से आपकी परेशानी दूर हो जाएगी।*

*9. बेरोजगार हैं तो होली की रात 12 बजे से पहले एक नींबू लेकर चौराहे पर जाएं और उसके चार टुकड़े कर चारों दिशाओं में फेंक दें। वापिस घर आ जाएं किन्तु ध्यान रहे, वापिस आते समय पीछे मुड़कर न देखें।*

*10. यदि आपका पैसा कहीं फंसा है तो होली के दिन 11 गोमती चक्र हाथ में लेकर जलती हुई होलिका की 11 बार परिक्रमा करते हुए धन प्राप्ति की प्रार्थना करें..फिर एक सफेद कागज पर उस व्यक्ति का नाम लाल चन्दन से लिखें जिससे पैसा लेना है फिर उस सफेद कागज को 11 गोमती चक्र के साथ में कहीं गड्ढा खोदकर दबा दें। इस प्रयोग से धन प्राप्ति की संभावना बढ़ जाएगी।*

*11. यदि आपको कोई अज्ञात भय रहता है तो होली पर एख सूखा जटा वाला नारियल, काले तिल व पीली सरसों एक साथ लेकर उसे सात बार अपने सिर के ऊपर उतार कर जलती होलिका में डाल देने से अज्ञात भय समाप्त हो जाएगा।*
*12. होलिका दहन के दूसरे दिन होलिका की राख को घर लाकर उसमें थोड़ी सी राई व नमक मिलाकर रख लें। इस प्रयोग से भूत-प्रेत या नजर दोष से मुक्ति मिलती है।*

*13. शत्रुओं से छुटकारा पाने के लिए होलिका दहन के समय 7 गोमती चक्र लेकर भगवान से प्रार्थना करें कि आपके जीवन में कोई शत्रु बाधा न डालें। प्रार्थना के पश्चात पूर्ण श्रद्धा व विश्वास के साथ गोमती चक्र जलती हुई होलिका में डाल दें।*
*14. शीघ्र विवाह के लिए होली के दिन किसी शिव मंदिर जाएं और अपने साथ 1 साबुत  पान, 1 साबुत  सुपारी एवं हल्दी की गांठ रख लें। पान के पत्ते पर सुपारी और हल्दी की गांठ रखकर शिवलिंग पर अर्पित करें। इसके बाद पीछे देखे बिना अपने घर लौट आएं। यही प्रयोग अगले दिन भी करें। इसके साथ ही समय-समय पर शुभ मुहूर्त में यह उपाय करते रहें । जल्दी ही विवाह के योग बन जाएंगे।*

*15. होली से शुरू करके बजरंग बाण का 40 दिन तक नियमित पाठ करने से हर मनोकामना पूर्ण हो सकती है।*

*होली में करने योग्य कुछ ज्योतिषीय  उपाय*
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*1.* होली दहन के दिन हनुमान जी के आगे घी का दिया जलायें तथा यह प्रार्थना जरूर करें -

श्रीगुरु चरण सरोज रज, निज मनु मुकुर सुधारि ।
बरनउ रघुवर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि ।।
मनोजवं मारुततुल्य वेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठं ।
वातात्मजं वानरयूथ मुख्यं श्री राम दूतं शरणं प्रपद्ये ।।

*2.* होली की रात सरसों के तेल का चौमुखी दीपक घर के मुख्य द्वार पर लगाएं । इससे हर प्रकार की बाधा का निवारण होता है।

*3.* यदि व्यापार या नौकरी में उन्नति न हो रही हो, तो 21 गोमती चक्र लेकर होलिका दहन की रात में शिवलिंग पर चढ़ा दें। इससे बिजनेस में फायदा होने लगेगा।

*4.* यदि राहु के कारण परेशानी है तो एक नारियल का गोला लेकर उसमें अलसी का तेल भरें। उसी में थोड़ा सा गुड़ डालें और इस गोले को जलती हुई होलिका में डाल दें। इससे राहु का बुरा प्रभाव समाप्त हो जाएगा।

*5.* धन हानि से बचने के लिए होली के दिन घर के मुख्य द्वार पर गुलाल छिड़कें और उस पर दो मुखी दीपक जलाएं। दीपक जलाते समय धन हानि से बचाव की कामना करें। जब दीपक बुझ जाए तो उसे होली की अग्नि में डाल दें। यह क्रिया श्रद्धापूर्वक करें, धन हानि नहीं होगी।

*6.* घर की सुख-समृद्धि के लिए परिवार के प्रत्येक सदस्य को होलिका दहन में घी में भिगोई हुई दो लौंग, एक बताशा और एक पान का पत्ता अवश्य चढ़ाना चाहिए। साथ ही होली की 11 परिक्रमा करते हुए होली में सूखे नारियल की आहुति देनी चाहिए ।

*7.* यदि आप बेरोजगार हैं तो होली की रात 12 बजे से पहले एक नींबू लेकर चौराहे पर जाएं और उसके चार टुकड़े कर चारों दिशाओं में फेंक दें। वापिस घर आ जाएं किन्तु ध्यान रहे, वापिस आते समय पीछे मुड़कर न देखें।

*8.* यदि आपका पैसा कहीं फंसा है तो होली के दिन 11 गोमती चक्र हाथ में लेकर जलती हुई होलिका की 11 बार परिक्रमा करते हुए धन प्राप्ति की प्रार्थना करें । फिर एक सफेद कागज पर उस व्यक्ति का नाम लाल चन्दन से लिखें जिससे पैसा लेना है फिर उस सफेद कागज को वही 11 गोमती चक्र के साथ में कहीं गड्ढा खोदकर दबा दें। इस प्रयोग से धन प्राप्ति की संभावना बढ़ जाएगी।

*9.* यदि आपको कोई अज्ञात भय रहता है तो होली पर एख सूखा जटा वाला नारियल, काले तिल व पीली सरसों एक साथ लेकर उसे सात बार अपने सिर के ऊपर उतार कर जलती होलिका में डाल देने से अज्ञात भय समाप्त हो जाएगा।

*10.* होलिका दहन के दूसरे दिन होलिका की राख को घर लाकर उसमें थोड़ी सी राई व नमक मिलाकर रख लें। इस प्रयोग से भूत-प्रेत या नजर दोष से मुक्ति मिलती है।

*11.* शत्रुओं से छुटकारा पाने के लिए होलिका दहन के समय 7 गोमती चक्र लेकर भगवान से प्रार्थना करें कि आपके जीवन में कोई शत्रु बाधा न डालें। प्रार्थना के पश्चात पूर्ण श्रद्धा व विश्वास के साथ गोमती चक्र जलती हुई होलिका में डाल दें।

*12.* शीघ्र विवाह के लिए होली के दिन किसी शिव मंदिर जाएं और अपने साथ 1 साबुत  पान, 1 साबुत  सुपारी एवं हल्दी की गांठ रख लें। पान के पत्ते पर सुपारी और हल्दी की गांठ रखकर शिवलिंग पर अर्पित करें। इसके बाद पीछे देखे बिना अपने घर लौट आएं। यही प्रयोग अगले दिन भी करें। इसके साथ ही समय-समय पर शुभ मुहूर्त में यह उपाय करते रहें । जल्दी ही विवाह के योग बन जाएंगे।

*13.* होली के दिन से शुरू करके बजरंग बाण का 40 दिन तक नियमित पाठ करने से हर मनोकामना पूर्ण हो सकती है।

होली पर विशेष सटीक प्रयोग व उपाय :-
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होली की रात्रि (जिस रात्रि होली में अग्नि लगाई जाती )साधकों और तांत्रिकों के लिए तो महत्वपूर्ण होती ही है परंतु आम व्यक्तियों के लिए भी कम महत्वपूर्ण नहीं होती ,क्योंकि इस दिन व्यक्ति अपनी बहुत सी या किसी भी समस्या का निदान साधनाओं या छोटे-छोटे प्रयोगों द्वारा कर सकता है | साधनाएँ बहुत लंबी होती हैं ,हर व्यक्ति के पास इतना समय नहीं होता कि ज़्यादा समय साधनाओं में दे सके.हालाँकि इस दिन की गयी 1 माला का प्रभाव लगभग 100 माला के बराबर होता है,इसलिए साधक और तांत्रिक लोग इस मुहूर्त का बहुत बेसब्री से इंतज़ार करते हैं,जिस से कम श्रम में लंबी साधनाएँ भी सिद्ध कर सकें |यहाँ हम कुछ ऐसे ही लघु प्रयोग देने जा रहे हैं ,जिनके द्वारा सामान्य व्यक्ति भी अपने दैनिक जीवन में आने वाली कई समस्याओं का स्माधान खुद कर सकते हैं,बस ज़रूरत है,श्रद्धा और विश्वास से इन लघु प्रयोगों को करने की |

मूल या बेसिक प्रयोग :
होलिका दहन की रात्रि में ,दहन के समय घर का प्रत्येक सदस्य होलिका को शुद्ध घी भिगोकर 2 लौंग ,1 बताशा और एक पान का पत्ता (डंडी सहित) अर्पित करे ,होली की 11 परिक्रमाएँ करें, 1 सूखा नारियल भी अर्पित करें ,परिक्रमा करते समय नये अनाज (जौ या गेहूँ के दाने)भी बाली सहित होलिका अग्नि को समर्पित करते रहें,कुंकुम,गुलाल और प्रसाद आदि अर्पित करें |
यदि आप घर पर भी होलिका दहन करते हैं तो मुख्य होली में से एक जलती लकड़ी घर पर लाकर नवग्रह की लकड़ियों (जो आजकल पूजा की दुकानों पर भी मिल जाती हैं) एवं गाय के गोबर से बने उपलो (गोबर से कहीं- कहीं बल्ग़ुरियाँ भी लोग बनाकर उपलो की जगह जलाते हैं)से घर पर होली प्रज्ज्वलित करना चाहिए |और ऊपर जो प्रयोग किया है ,उसे मुख्य होली पर ना करके घर पर भी कर सकते हैं,घर का प्रत्येक सदस्य शुद्ध घी में भिगोकर 2 लौंग,1 बताशा ,और पान का एक पत्ता ,और एक सूखा नारियल अर्पित करें, और फिर 11 परिक्रमाएँ होली की घर के सभी सदस्य करें |ये मूल प्रयोग है|

प्रयोग 3.आर्थिक समस्या से मुक्ति के लिए :
यदि आप किसी तरह की आर्थिक समस्या से ग्रस्त हैं,तो होली की रात्रि में चाँद निकलने के बाद अपने निवास की छत पर आ जाएँ | चंद्र देव का स्मरण कर शुद्ध घी के दीपक के साथ धूप ,अगरबत्ती आदि अर्पित कर कोई भी सफेद रंग का प्रसाद (दूध या मावे से बनी कोई मिठाई) तथा साबूदाने की खीर अर्पित करें ,और अपने निवास स्थान सुख -शांति के साथ-साथ स्थाई आर्थिक समृद्धि के लिए प्रार्थना करें |बाद में प्रसाद को बच्चों में बाँट सकते हैं |कुछ समय बाद आप स्वयं अनुभव करेंगे कि आपकी आर्थिक समस्याएँ कम होकर लाभ की स्थिति बन रही है ,और उत्तरोत्तर यह आपको ये सुख -समृद्धि के द्वार तक ले जाएगी |इस उपाय को प्रत्येक पूर्णिमा को किया जा सकता है |

प्रयोग 4.आर्थिक समस्या का स्थाई समाधान ;
इस उपाय को अगर होली की रात कर लिया जाए तो इसके प्रभाव से आप कभी भी आर्थिक समस्या में नहीं आएँगे |इसके लिए होली की रात्रि में सबसे पहले अपने घर या व्यावसायिक प्रतिष्ठान में शाम को सूर्यास्त होने के पूर्व दिया-बत्ती अवश्य करें |घर या प्रतिष्ठान की सारी लाइट जला दें| घर के पूजा स्थल के सामने खड़े होकर लक्ष्मी जी का कोई भी मंत्र 11 बार मानसिक रूप से जपें |फिर घर या प्रतिष्ठान की कोई भी कील लाकर ,जिस स्थान पर होली जलनी है ,वहाँ की मिट्टी में दबा दें |इस उपाय से आपके घर/प्रतिष्ठान में किसी भी तरह की नकारात्मक शक्ति का प्रवेश नहीं होगा और आप आर्थिक संकट में भी कभी नहीं आएँगे |
विशेष :- यदि ये करना संभव ना हो तो आप इसे इस तरह भी कर सकते हैं कि होली की रात्रि ,होली जलने के बाद आप बनने वाली थोड़ी गर्म राख घर ले आएँ,फिर घर के मुख्य द्वार के अंदर की तरफ ज़मीन पर कील रख कर उसके ऊपर होली की राख डाल दें और ऊपर से किसी चीज़ से ढक दें |दूसरें दिन कील को उपरोक्त विधि के अनुसार प्रयोग करें और राख को जल में प्रवाहित कर दें |इस से भी आपको उपरोक्तानुसार समुचित लाभ प्राप्त होगा |

प्रयोग 1.ग्रह दोष निवारण के लिए:
यदि आपको कोई ग्रह पीड़ित कर रहा है तो होलिका दहन के अगले दिन होली की थोड़ी सी राख लाकर(ठंडी होने के बाद)अपने शरीर पर पूरी तरह (तेल की तरह)मल लें,और 1 घंटे बाद गरम पानी से स्नान कर लें,आप ग्रह पीड़ा से तो मुक्त होंगे ही,साथ ही यदि आप पर किसी ने अभिचार-प्रयोग कोई किया है ,तो आप उस से भी मुक्त हो जाएँगे |
ऐसा करना संभव ना हो तो होली के बाद किसी भी सर्वार्ट सिद्धि योग जिस दिन पड़ता हो,उस दिन होली की राख को बहते जल या किसी नदी या तालाब में विसर्जित कर दें,आप ग्रह बाधा से मुक्त हो जाएँगे |

प्रयोग 2.शनि दोष समाप्त करने के लिए :
यदि शनि ग्रह के कारण आपको परेशानियाँ आ रही हैं ,या कार्यों में व्यवधान आ रहा है ,तो होली वाले दिन,होलिका दहन के समय काले घोड़े की नाल या शुद्ध लोहे का छल्ला बनवाकर होली की 2 परिक्रमाएँ करने के बाद होलिका अग्नि में डाल दें |दूसरे दिन होली की अग्नि शांत होने उस छल्ले को निकाल कर ले आएँ |उस छल्ले को कच्चे दूध (गाय का हो,तो बेहतर) एवं शुद्ध जल में धोकर शनिवार के दिन सायंकाल या शनि की होरा में दाहिने हाथ की मध्यमा अंगुली में शनि देव जी का मंत्र पढ़ते हुए धारण कर लें|आपकी परेशानियाँ और व्यवधान धीरे- धीरे दूर हो जाएँगे |

[प्रयोग 5.बार- बार आर्थिक हानि रोकने के लिए :
होलिका दहन की शाम को अपने मुख्य द्वार की चौखट पर दो मुखी आटे का दीपक बनाकर ,चौखट पर थोड़ा सा गुलाल छिड़क कर ,दीपक जलाकर उस पर रख दें | दीपक जलाते समय मानसिक रूप से अपनी आर्थिक हानि रोकने की प्रार्थना ईश्वर से करें|दीपक ठंडा हो जाने पर उसे जलती होलिका अग्नि में डाल दें |

प्रयोग 6.तंत्र -बाधा निवारण के लिए :
अगर आपको ऐसा लगता है कि किसी व्यक्ति ने आप पर या परिवार के किसी सदस्य पर कोई बड़ा तंत्र -प्रयोग करवाया है ,तो मूल प्रयोग को करने के साथ थोड़ी मिश्री भी होलिका अग्नि में समर्पित करें | अगले दिन होली की राख लाकर ,चाँदी के ताबीज़ में भर कर लाल या पीले धागे में ,गले में धारण करें /करवाएँ |

प्रयोग 7.रुके /फँसे धन की प्राप्ति के लिए :
यदि आपके धन को कोई व्यक्ति वापिस नहीं कर रहा है ,तो जिस दिन होलिका दहन होना है ,उस दिन होली जलने वाले स्थान पर जाकर ,उस स्थान पर अनार की लकड़ी की कलम से उस व्यक्ति का नाम लिख कर ,होलिका माता से अपने धन की वापसी की प्रार्थना करते हुए उसके नाम पर हरा गुलाल इस प्रकार छिड़क दें ,जिस से पूरा नाम गुलाल से ढक जाए,अर्थात नाम दिखाई ना दे | इस उपाय के बाद कुछ ही समय में वो आपके धन को वापिस कर देगा |

प्रयोग 8.आजीविका/नौकरी प्राप्ति के लिए :
होली की रात्रि में काले तिल के 21 दाने दाहिने हाथ में लेकर होलिका दहन के पूर्व 8 परिक्रमा करें,परिक्रमा करते समय निम्न मंत्र का मानसिक जप करते रहें---
मंत्र :--"ॐ फ्राँ फ़्रीं सः |"
जब परिक्रमा पूर्ण हो जाए ,तो काले तिलों को चाँदी के ताबीज़ में भर कर होली की रात्रि को ही गले में धारण कर लेने से नौकरी में आने वाले व्यवधान दूर होते हैं |इंटरव्यू में भी ये पहन कर जाएँ,सफलता मिलेगी |

प्रयोग 9.शत्रु -बाधा निवारण के लिए :
होली की रात्रि में काँसे की थाली में कनेर के 11पुष्प तथा गूगल की 11 गोलियाँ रख कर जलती हुई होली में नीचे दिए मंत्र को पढ़ते हुए जलती होलिका में डाल दें -------
मंत्र :-"ॐ हृीं हुम फट् .|"

प्रयोग 10.शत्रुता दूर करने के लिए :
होलिका दहन की दूसरी रात्रि को 12 बजे के बाद अनार की कलम से होली की राख में शत्रु का नाम लिखें और बाएँ हाथ से मिटा दें पुनः उसी स्थान पर एक उर्ध्व मुखी त्रिकोण बनाकर उसके बीच में "हृीं" लिख कर यंत्र बनाएँ.उसके बाद वहाँ से कुछ राख लेकर वापस आ जाएँ |ये राख शत्रु के सिर पर डालते ही उसकी शत्रुता समाप्त हो जाएगी |

प्रयोग 11.धन- प्राप्ति के लिए :
आर्थिक कष्ट दूर करने के लिए होली वाले दिन कमलगट्टा की माला लेकर होली की परिक्रमा करते हुए निम्न श्री यंत्र के मंत्र को 108 बार जप करें---
मंत्र :- "ॐ श्रीं हृीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद: प्रसीद: श्रीं हृीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्ये नमः |"
मंत्र जप पूर्ण होने पर माला पहन कर होली के समीप गॉ-घृत का दीपक जलाकर घर लौट आएँ,फिर एक माला नित्य इस मंत्र की करते रहें |जल्दी ही धन-प्राप्ति के योग बनेंगे |

प्रयोग 12.स्वास्थ्य लाभ के लिए :
होलिका दहन के समय होली की 11 परिक्रमा करते हुए निम्न मंत्र का जप मन ही मन में करना चाहिए ----
मंत्र :---"देहि सौभाग्यम आरोग्यम ,देहि में पर मम सुखम |
रूपम देहि ,जयम देहि ,यशो देहि ,द्विशो जहि ||"
होली के बाद नित्य प्रातः इस मंत्र का कम से कम 11 बार अवश्य जप करें |
प्रयोग 13.तंत्र-बाधा (अभिचार-कर्म) निवारक प्रयोग :
होली की रात्रि में या किसी अन्य सिद्ध मुहूर्त में लकड़ी के बाजौट (चौकी) पर लाल वस्त्र बिछाकर ,उस पर तांबे के पात्र में जल भर कर ,पान का एक पत्ता उसमें डाल कर रख दें |तांबे के पात्र को काले तिल की ढेरी पर स्थापित पर,सरसों के तेल का दीपक जला लें |फिर निम्न मंत्र की 21 माला जप कर तांबे के पात्र में रखे जल को अभिमंत्रित कर ,पूरे घर में पान के पत्ते से छिड़काव करें |
जल की कुछ मात्रा घर का प्रत्येक सदस्य ग्रहण करे तो तंत्र-बाधा शांत होती है |
मंत्र :-"ॐ आं हृीं क्रों ऐन्ग "
काले तिलों को शनिवार के दिन बहते जल में विसर्जित कर दें |
प्रयोग 14.धन-सन्चय करने के लिए :
धन-सन्चय के लिए होली के दिन कौड़ी का पूजन का पूजन कर लाल वस्त्र में बाँध कर किसी अलमारी या संदूक में रख दें | इस दिन जो व्यक्ति कौड़ी अपने पास रखता है,उसे वर्ष भर आर्थिक अनुकूलता बनी रहती है ।

Sunday, 10 February 2019

તાડ નાં ફળ નાં ફાયદા

તાડ ના જંગલી ફળ - ફાયદા જાણીને દંગ રહી જશો.

ગરમીના વધતા તાપમાન થી રાહત મેળવવા અને શરીરની ઉણપને દુર કરવા માટે ગરમીમાં ખાવા માટે ઘણા એવા ફળ હોય છે જે આપણા શરીર માટે ખુબ જ જરૂરી ગણાય છે. એટલા માટે આ ફળને આઈસ એપલના નામથી પણ ઓળખવા માં આવે છે. આ ફળના વૃક્ષનું નામ તાડનું વૃક્ષ છે. તો ચાલો જાણીએ આ ફળના ફાયદા વિશે.
તાડના વૃક્ષનું ફળ બીજા ફળ સમાન જ શરીરને તદુરસ્ત રાખે છે એ ઘણી બીમારીઓ માંથી રાહત આપવા માં કામ કરે છે. જેનાથી શરીરને એનર્જી મળે છે. તાડના વૃક્ષના ફળનો સ્વાદ નારીયેલ  ના ફળની સમાન હોય છે. તો ચાલો તાડના વૃક્ષ સાથે સંકળાયેલા ફાયદા વિશે જાણકારી જાણીએ. તાડનું ફળ એ લોકો માટે એક સારો વિકલ્પ છે જે પર્યાપ્ત આહાર લઇ શકતા નથી. આ બાળકો અને વયસ્કોમાં કુપોષણને પણ રોકે છે.
સવારે તાજા તાડીનો ઉપયોગ દવાના રૂપમાં કરવામાં આવે છે. એનું સેવન પેટની બીમારીઓ દુર કરે છે. આ પથરીને ગળવાનું કામ કરે છે. અથવા કિડનીની બીમારીઓમાં પણ લાભદાયક બને છે.
આ ફળનો ઉપયોગ શરીરની તાકાત વધારવા માટે પણ કરવામાં આવે છે. ખેતર માં પરિશ્રમ કરતા ખેડૂતોનું આ ફળ મુખ્ય ફળો માંથી એક છે આ ફળને એ લોકો ખાધ્યા પછી જુન જુલાઈ મહિનામાં આખો દિવસ ખેતરમાં કામ કરી શકે છે. જો આ ફળનું તમે સેવન કરો છો તો તમારામાં એનર્જીની ઉણપ રહેશે નહિ અને તમારું શરીર ખુબ જ તાકાત વાળું રહે છે.તાડના વૃક્ષના ફળમાં ઘણા પ્રમાણમાં પોટેશિયમ રહેલુ હોય છે, જે શરીર ની અંદરની ગંદકીને સાફ કરીને લીવરને સુરક્ષિત રાખવામાં દદ કરે છે. આ શરીરની અંદર ના ઝેરીલા પદાર્થને બહાર કાઢવામાં મદદ કરે છે, જેનાથી શરીરના ઘણા પ્રકાર ના રોગો પણ દુર થઇ જાય છે. આ ફળનું સેવન કરવાથી ખુબ જ ફાયદો થાય છે.

Tuesday, 5 February 2019

रामफल - केंसर पर रामबाण इलाज

कीमोथेरेपी से है 10 हज़ार गुना अधिक प्रभावशाली माना जाता है "रामफल"

ग्रेविओला जिसे हिंदी में रामफल कहते है, ज्यादातर अफ्रीका , दक्षिण अमेरिका और दक्षिणपूर्व एशिया के बरसाती जंगलों में पाया जाता है. कुछ साल पहले जब इसके बारे में नए रिसर्च किये गए तो पता चला की इसके रस में कई ऐसे तत्व होते है जो कैंसर का इलाज करने में काम आ सकता है. यह तत्व यकृत और स्तन कैंसर के कीटाणुओं को मारने की क्षमता रखतें है.यह शरीफे की तरह दिखने वाला फल भारत के कई इलाकों में भी मिलता है जैसे हैदराबाद जो तेलंगाना की राजधानी है. यहाँ की भाषा “तेलुगु” में भी इसे रामफल ही कहतें हैं. क्या रामफल सचमुच कैंसर को मारने की क्षमता रखता है. चलिये देखते है की इस खट्टे फल की क्या क्या खास बातें है और ये कैसे स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है ।
ग्रेविओला या रामफल मिलता कहाँ है ?
रामफल का पेड़ एक सदाबहार पेड़ है जो क्यूबा, मध्य अमेरिका, मैक्सिको, कोलंबिया, ब्राजील, पेरू, वेनेजुएला और अन्य अमेज़न के वर्षावन क्षेत्रों में पाया जाता है. यह फल लाखों कैंसर के रोगियों के लोगों के साथ-साथ उनके डॉक्टरों के लिए आशा की एक किरण के रूप में आता है। इसका वैज्ञानिक नाम एनोना मुरिकाता है, और इस फल को कैंसर के प्राकृतिक इलाज के रूप में पूरे समुदाय के लिए एक भगवान का उपहार माना जा सकता है। वैसे कई परिक्षण किए गए हैं लेकिन इसे कैंसर के लिए एक सिद्ध उपचार के रूप में घोषित करने से पहले बहुत और परिक्षण करने की जरूरत है. अभी तक के रिसर्च से ये माना जा रहा है के ये फल कैंसर के इलाज़ में काफी कारगर हो सकता है। ग्रेविओला , पत्ते, पाउडर, कैप्सूल के रूप में और यहां तक कि तरल रूपों में विभिन्न रूपों में उपलब्ध है ।
ग्रेविओला- एक फल अलग-अलग नाम-ग्रेविओला के समानार्थी शब्द
स्पेनिश लोग इसे “गुआनबाणा ” फल कहते हैं। पुर्तगाली “ग्रेविओला ” कहते हैं। ब्राजीलियाई ऐसे गंदा, गुयाबानो, करोसोलिएर , गुआनावाना , टोगे बांरेिसि , डूरियन बंगला , नंगका ब्लॉन्डा , सिर्सक , और नंगका लोंडा के रूप में अलग-अलग नामों से बुलाते हैं । दक्षिण भारतीय राज्य केरल में, यह बस कांटों के साथ शरीफा,या “मुल्लथा ” के रूप में जाना जाता है। अन्य भारतीय क्षेत्रों में, यह शूल -राम-फल और हनुमान फल के रूप में जाना जाता है।यह बड़े फल आकार का एक खट्टा फल है । यह कच्चा खाया जाता है और इसके गूदे या रस का शर्बत तैयार करने में भी उपयोग हो सकता है. इस फल के कैंसर रोधक गुण उल्लेखनीय हैं। कुछ रिपोर्टों के अनुसार, यह एक नियमित कीमोथेरेपी से दस हजार गुना अधिक प्रभावी हो सकता है।
ग्रेविओला के स्वास्थ्य लाभ और कुछ सामान्य गुण
Graviola Health Benefits In Hindi
इससे भी बड़ी बात ये है कि यह एक प्राकृतिक फलों का रस है, इसलिए किसी भी तरह का साइड इफ़ेक्ट नहीं होता ।
वैसे ग्रेविओला कई तरह के इलाज में उपयोग किया जाता है, यह मुखयतः अपने कैंसर विरोधी प्रभाव के लिए बहुत लोकप्रिय हो गया है ।
पेट के कीड़े और परजीवी इस फल से स्वाभाविक रूप से मारे जाते है
इसमें कोई शक नहीं कि ग्रेविओला कैंसर की रोकथाम का काम करता है
ग्रेविओला उच्च रक्तचाप के प्रबंधन और उपचार में भी प्रयोग किया जाता है
अपने एंटीबायोटिक या माइक्रोबियल विरोधी गुणों के कारण ग्रेविओला फंगल संक्रमण से लड़ने में अद्भुत काम करता है
तनाव, अवसाद और तंत्रिका संबंधी विकार से पीड़ित लोगों को इस फल लेने के बाद सकारात्मक परिणाम दिखाई दिए है
ग्रेविओला पेड़ कहीं भी आसानी से उगाया जा सकता है जैसे हैदराबाद और कई दूसरे जगहों पर ।

ग्रेविओला के औषधीय गुण
Medicinal Benefits Of Graviola In Hindi
इसकी पत्तियां कैंसर कोशिकाओं को मारने में समान रूप से प्रभावी हैं ।
यह कैंसर की कोशिकाओं को मारता है और एक प्राकृतिक चिकित्सा के रूप में प्रभावी है ।
जो इस फल का उपयोग करता है, उसका समग्र दृष्टिकोण में सुधार आता हैं ।
यह पेड़ और इसके हिस्से कई घातक संक्रमण के खिलाफ काम करतें है ।
केमो चिकित्सा के विपरीत इससे वजन घटना, बालों का झरना और मतली जैसे में कोई साइड इफेक्ट नहीं है ।
चाहे उपचार कितने दिन भी चले , आप हमेशा मजबूत और स्वस्थ महसूस करते हैं ।
ग्रेविओला का रस एक प्रतिरक्षा प्रणाली बूस्टर और रक्षक का काम करता है ।
ग्रेविओला पेड़ के रस का लाभ
इसका रस पेट के कैंसर, स्तन कैंसर, प्रोस्ट्रेट कैंसर, अग्नाशय के कैंसर और फेफड़ों के कैंसर कोशिकाओं को मारता है कैंसर कोशिकाओं को मारने के क्रम में यह स्वस्थ कोशिकाओं को कोई नुकसान नहीं करता है
ग्रेविओला के अन्य औषधीय उपयोग
ग्रेविओला पेड़ की छाल, जड़ और यहां तक कि फल के बीज विभिन्न स्वास्थ्य के मुद्दों के इलाज के लिए इस्तेमाल किया गया है, जैसे :

खराब लिवर
दमा
दिल के रोग
गठिया और जोड़ों से संबंधित बीमारियों

Saturday, 12 January 2019

सूर्य नमस्कार प्रक्रिया इतिहास व फायदे

✍🏽  सूर्यनमस्काराची
              निर्मिती

रथसप्तमीबरोबर सूर्यनमस्काराचे महत्त्व कसे जोडले गेले आहे, तसेच सूर्योपासना आणि सूर्यनमस्काराच्या निर्मितीपासूनचे महत्त्व अभ्यासण्यासाठी केलेला हा लेखनप्रपंच-  

*सूर्यनमस्काराची निर्मिती*

माणसाने परमेश्वराला प्रथम पाहिले ते सूर्याच्या रूपात. माणसांत आणि एकंदर सजीव सृष्टीत जे चैतन्य आहे ते सूर्यापासून आले आहे असे  मानले जाते. परंतु या चैतन्यातून एकापेक्षा एक असे पराक्रम साकार करायचे असतील, तर सूर्योपासनेचे विशिष्ट असे शास्त्र तयार करायला हवे असे भारतातील ऋषींना वाटले. आणि त्यांनी केलेल्या चिंतनातून सूर्यनमस्कार जन्माला आले. यामुळे सूर्योपासना आणि सूर्यनमस्काराचे भारतीय संस्कृतीतील महत्त्व अनन्यसाधारण आहे.

*प्राचीन सूर्यमंदिरे व सूर्योपासना यांचे महत्त्व*

सूर्याला देवता मानले जाते. सूर्यनमस्काराबरोबरच सूर्यनमस्काराची उपासना गायत्री स्वरूपात किंवा सूर्यस्तुती, अशा कोणत्याही स्वरूपात सूर्योपासना केल्यास एकाग्रता साध्य होते. तसेच बुद्धी, स्मृती तीक्ष्ण होतात. शिवाय आकलनशक्तीही सुधारते.

      भारतात सूर्यमंदिरे फारच थोडी आहेत. सौराष्ट्रातील वेरावळ, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, नेपाळ, कोणार्क इ. ठिकाणी सूर्यमंदिरे आहेत. आपल्या महाराष्ट्रातील रत्नागिरी जिल्ह्यात राजापूर तालुक्यात कशेळी या गावी शेकडो वर्षांपासून असलेले हे सूर्यमंदिर मुख्य मार्गाकडून केवळ तीन ते चार किमीवर हे नितांत सुंदर देवस्थान वसलेले आहे.

       उगवत्या व मावळत्या् सूर्याला दंडवत घालणे हे सूर्यनमस्काराचे प्रमुख उद्दिष्ट आहे.

*सूर्यनमस्काराचे ऐतिहासिक महत्त्व*

सूर्यनमस्कारात वापरल्या जाणा-या  आसनांचा ऐतिहासिक ग्रंथात उल्लेख आढळतो. श्री समर्थ रामदास सूर्यनमस्काराचा वापर शरीरसौष्ठवासाठी करत असत.

सूर्यनमस्कार करताना म्हटले जाणारे मंत्र व त्यांचे महत्त्व

प्रत्येक सूर्यनमस्काराची सुरुवात करताना मंत्र म्हटले जातात. त्या प्रत्येक मंत्राचा संबंध शरीरातील चक्राशी आहे. –

  क्र.           मंत्र             आसन

१.     मित्राय नमः        अनाहत चक्र

२.     रवये नमः         विशुद्ध चक्र

३.     सूर्याय नमः       स्वाधिष्ठान चक्र

४.     भानवे नमः       आज्ञा चक्र

५.     खगाय नमः       विशुद्ध चक्र

६.     पुष्णे नमः        मणिपूर चक्र

७.     हिरण्यगर्भाय नमः   स्वाधिष्ठान चक्र

८.     मरीचये न मः      विशुद्ध चक्र

९.     आदित्याय नमः    आज्ञा चक्र

१०.     सवित्राय नमः      स्वाधिष्ठान चक्र

११.     अर्काय नमः       विशुद्ध चक्र

१२.     भास्कराय नमः    अनाहत चक्र

*सूर्यनमस्कार करताना सूर्याचीच नावे का म्हणावी ?*

   सूर्याला चराचर सृष्टीचा आत्मा मानले जाते. सकाळची सूर्यकिरणे अंगावर घेत प्रणवासहित त्याचे नामोच्चरण, दर्शन व सूर्यनमस्कार घालणे म्हणजे एकाचवेळी शारीरिक, मानसिक वा आध्यात्मिक शक्तिंचा विकास साधणे होय. सूर्यावाचून काहीच व्यवहार चालत नाही. मग अंधांना सूर्याचे दर्शन कसे घडावे? एवढे सूर्याला महत्त्व आहे.

*सूर्यनमस्कारामुळे होणारे लाभ*

सूर्यनमस्कारात आरोग्य, दीर्घायुष्य, कार्यक्षमता हेच ध्येय डोळ्यासमोर ठेवायचे असते. या आसनामुळे आयुष्य, बल आणि बुद्धिचा विकास होतो. मस्तक, मान, हात, पाय, छाती, पोट, कंबरेचे स्नायू, मेरूदंड, पायाची बोटे, गुढगे, सर्व सांधे यांना व्यायाम घडतो. तसेच पोटाचे जडत्व, अनावश्यक वाढलेला मेद, ओटीपोटातील चरबी, थायरॉईडसारखे विकार,  मुलांचे फिरलेले हातपाय व काही हाडांचे दोष, गंडमाळा, घशातील विकार नाहिेसे होतात. क्षयापासून संरक्षण मिळते, मनोबलाचा विकास होतो. शरीरात शुद्ध रक्ताचा सारख्या प्रमाणात संचार होतो.

🌷आरोग्यम् धनसंपदा 🌷
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पान का पत्ता - एक वरदान

किसी समारोह में या घर पर भोजन के बाद, बेहतर पाचन और मुखवास के रूप में प्रयोग किया जाने वाला पान, केवल स्वाद की पुड़िया नहीं है, बल्कि इससे आपकी कई तरह की समस्याएं हल हो सकती हैं..जानिए किन समस्याओं में कारगर है पान का पत्ता –

1- एंटीसेप्टिक – पान का पत्ता एक एंटीसेप्टिक का काम करता है। छोटी-मोटी चोट या खरोंच आने पर, या मोच आने पर पान का पत्ता लपेटना, या उसे पीस कर लगाने से लाभ होता है ।
2 नकसीर – नकसीर या नाक से खून आने की समस्या में पान के पत्ते सूंघने से लाभ होता है, और खून आना बंद हो जाता है।
3 लाल आंखें- थकान, नींद न होना या फिर आंखों में किसी कारण से समस्या होने पर, जब आंखें लाल हो जाएं, तो पान के पत्ते उबालकर ठंडे किए गए पानी के छींटे आंखों पर मारें।
4 मोटी आवाज- आवाज मोटी होने की स्थति में पान खाना और उसका पानी पीना बेहद लाभदायक होता है। इससे आवाज भी ठीक होती है, अैर गले की समस्याएं भी खत्म हो जाती हैं।
5 मसूड़े – मसूड़ों में खून आने या अन्य तकलीफ होने पर, पान को उबालकर उसके पानी से गरारे करने से, मसूड़ों से खून का की समस्या में लाभ मि‍लता है।
6 ब्रोंकाईटिस – पान के 7 पत्ते को दो कप पानी में चीनी के साथ उबालें। जब यह पानी 1 गिलास रह जाए, तब इसे दिन में 3 बार पीने से ब्रोंकाईटिस में लाभ होता है।
7 कफ – पान के 15 पत्ते, तीन गिलास पानी में उबालें । जब यह पानी एक तिहाई रह जाए तो इसे दवा के रूप में दिन में 3 बार पिएं। इससे कफ निकलने में आसानी होगी।
8 शरीर की दुर्गंध – शरीर की दुर्गंध लगातार बने रहने पर, पान के 5 पत्ते, दो कप पानी में उबालकर इस पानी को दोपहर के वक्त पीने से लाभ मि‍लता है।
9 खुजली – शरीर में खुजली की समस्या होने पर, पान के पत्ते उबालकर उस पानी से नहाने से खुजली ठीक हो जाती है।
10 स्तनपान – स्तनपान कराते समय दर्द अैर सूजन के कारण परेशानी आ रही हो, तो पान के पत्तों पर नारियल का तेल लगाकर हल्का सा गर्म कर लें, और स्तनों के पास रखें। इससे सूजन कम होगी और स्तनपान में आसानी होगी।
11-बवासीर- दो दिन सिर्फ पान के पत्ते खाएं और इसके अलावा कुछ नहीं। 48 घंटे में बवासीर जड़ से खत्म हो जाएगी। अब तक कई लोग इस नुस्खे से ठीक हो चुके हैं।
तो आजमाएं यह वरदान अपने स्वास्थ्य के लिए ।